डॉ. रामकृष्ण के गीत
वस्तियाँ हैं, घर- घरौंदे, घंटियाँ बजतीं मंदिरों की सीढ़ियों पर चींटियाँ पलतीं।। खेत हैं ,खलिहान है, चौपाल जमता है धूप में, नम चाँदनी में मन विरमता है।। भेट की…
डाॅ. मधुसूदन साहा के दस दोहामुक्तक
(1) सोचा था कुछ और ही, हुआ मगर कुछ और। दस्तक देने लग गया, फिर दुर्दिन का दौर। कहीं खूब बारिश हुई, कहीं धूल ही धूल, मौसम के इस खेल…
संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ.बी.आर.अम्बेडकर के जीवन पर प्रेरणा दायक और शिक्षाप्रद डांस-ड्रामा शो ”14 अप्रैल डॉ.भीम राव अम्बेडकर” का हुआ सफल आयोजन*
*(राजू बोहरा)* नई दिल्ली, लंबे समय से आर्ट एंड कल्चर को समर्पित दिल्ली की जानीमानी संस्था ‘स्पेस परफॉर्मिंग आर्ट्स’ ने 16 अगस्त 2024 शुक्रवार को संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के…
चितरंजन भारती की कहानी- * जड़ों की ओर *
“उस किताब को तुम देख रही हो” देवजीत देवबर्मन उससे मुस्कुराकर बोला- “उसने मेरा जीवन बदल दिया था।” “वह कैसे” माधवी उत्सुकता से भरकर बोली- “जब वह किताब तुम्हारी थी,…
डॉ. आशा सिंह सिकरवार की कविताएं
'बुरे दिनों में ' ( 1 ) बुरे दिनों में मुझे याद आये वे लोग जो बुराई के ख़िलाफ़ लड़े थे। ( 2 ) बुरे दिनों में आटा दाल का…
उमरचंद जायसवाल की ग़ज़लें
1. फिर कोई दिलदार मिला है मुझको मेरा प्यार मिला है अपलक नैनों से उसे देखूं जीवन का आधार मिला है भटका दर-दर अब जा पाया मुझको भी घर-बार मिला…
डॉ. रामकृष्ण के गीत
1. अब नहीं भाते, चिढ़ाते टेसुओं के फूल। दोपहर की चिलचिलाती स्वयं कुपिता धूप। तवे सी धरती दहकती हवा भी विद्रूप।। हरे होने लगे तीखे बबूलों के शूल।। चक्रवत घिरनी…
ममता जयंत की कविताएं
1. मजदूर -------------------- उनका होना चेतना का होना है उनका चलना विकास का चलना है उनका ठहरना प्रगति का ठहरना है उनका जागना उम्मीदों का जागना है उनका खोना विचारों…
डाॅ एम डी सिंह की ग़ज़लें
**** यूं पिट रही छातियों का कसूर पूछता हूं हो रही मातमपुर्सी का दस्तूर पूछता हूं था कहा उसने कभी न मौत पे रोना बच्चों क्यों फिर भी हाय-तौबा बदस्तूर…
सत्येन्द्र कुमार रघुवंशी के गीत
*जीवन फूलों-भरी लता है* लोग थका-माँदा न समझ लें, रखना कुछ तो वेग डगों में। माना सड़कें हैं पत्थर की, पर उनको हर कूच पता है। है मालूम कंटकों को…