वेद प्रकाश की कविताएं
मैं हवा के झोंका की तरह आऊंगा मैं हवा के झोंका की तरह आऊंगा पेड़ झूमने लगेंगे पक्षियों के कलरव से धरती गूंज उठेगी आकाश समुद्र की ओर झुकने लगेंगे…
हरिशंकर परसाई के विशेष संदर्भ में कांतिकुमार जैन के संस्मरण
कांति कुमार जैन के 'लौट कर आना नहीं होगा', 'तुम्हारा परसाई ',' बैकुंठपुर में बचपन', 'जो कहूंगा सच कहूंगा'और 'अब तो बात फैल गई' संस्मरण लिखे है। ' तुम्हारा परसाई'…
अशोक शुभदर्शी की कविताएं
दर्द चुप नहीं रहा समाज देखकर उसकी विक्षिप्तता उसके सोच- व्यवहार में आई कमी को यह जो दिख रही थी उसकी सक्रियता- सी यह उसकी महत्वाकांक्षा नहीं थी यह उसमें…
युवा कवि गोलेन्द्र पटेल की छह कविताएँ
1). *मेरा दुःख मेरा दीपक है* जब मैं अपनी माँ के गर्भ में था वह ढोती रही ईंट जब मेरा जन्म हुआ वह ढोती रही ईंट जब मैं दुधमुंहाँ शिशु…
रानीखेत में साहित्य समागम
रानीखेत से विमल सती एवं राजेंद्र पंत की रिपोर्ट खूबसूरत पर्यटक नगरी रानीखेत (उत्तराखंड) में दिनांक 22 जून 2024 को रानीखेत सांस्कृतिक समिति एवं कविजन हिताय द्वारा साहित्य समागम का…
सुलोचना वर्मा की कविताएं
बस नम्बर -185 चढ़ता है दिल्ली के सीने पर दौड़ती एक सौ पचासी नम्बर की बस में भूमंडलीकरण के प्रति सम्पूर्ण उदासीन एक किशोरवय कृशकाय बालक फँसाकर दो पत्थरों को…
डॉ. आरती कुमारी की ग़ज़लें
1 तेरी याद में जो गुज़ारा गया है वही वक़्त अच्छा हमारा गया है तुम्हें मेरी हालत पता क्या चलेगी मेरा जो गया कब तुम्हारा गया है तुम्हें इश्क़ का…
आलोचक-लेखक परशुराम जी नहीं रहे – अरुण माहेश्वरी
बहुत दुखद खबर है कि कोलकाता के साहित्य जगत में हमारे लगभग चार दशक से भी ज़्यादा समय के साथी परशुराम जी नहीं रहे । फ़ेसबुक पर मित्रों की पोस्ट…
सरला माहेश्वरी की कविताएँ
1. लापता लेडीज ! एक नयी नवेली दुल्हन नहीं जानती अपने ससुराल का पता भी ठीक से घूँघट ओढ़े गठरी जैसी बैठी है रेल के डिब्बे में उसके जैसी ही…
बदल रहा है प्रेमचंद का लमही गाँव
लमही से लौटकर सुशील स्वतंत्र प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई) पर विशेष आज अगर आप प्रेमचंद के गांव लमही जाते हैं तो गांव में प्रवेश करने से पहले ही प्रेमचंद स्मृति…