डॉ. आरती कुमारी की ग़ज़लें
1 तेरी याद में जो गुज़ारा गया है वही वक़्त अच्छा हमारा गया है तुम्हें मेरी हालत पता क्या चलेगी मेरा जो गया कब तुम्हारा गया है तुम्हें इश्क़ का…
आलोचक-लेखक परशुराम जी नहीं रहे – अरुण माहेश्वरी
बहुत दुखद खबर है कि कोलकाता के साहित्य जगत में हमारे लगभग चार दशक से भी ज़्यादा समय के साथी परशुराम जी नहीं रहे । फ़ेसबुक पर मित्रों की पोस्ट…
सरला माहेश्वरी की कविताएँ
1. लापता लेडीज ! एक नयी नवेली दुल्हन नहीं जानती अपने ससुराल का पता भी ठीक से घूँघट ओढ़े गठरी जैसी बैठी है रेल के डिब्बे में उसके जैसी ही…
बदल रहा है प्रेमचंद का लमही गाँव
लमही से लौटकर सुशील स्वतंत्र प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई) पर विशेष आज अगर आप प्रेमचंद के गांव लमही जाते हैं तो गांव में प्रवेश करने से पहले ही प्रेमचंद स्मृति…
* ‘शब्दाक्षर’ दक्षिण कोलकाता का मासिक काव्य-सम्मेलन सम्पन्न *
कोलकाता: रविवार की शाम 'शब्दाक्षर' दक्षिण कोलकाता जिला समिति, ने भारतीय विज्ञान कांग्रेस संस्थान, पार्क सर्कस, कोलकाता में एक सबरस कवि सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 'शब्दाक्षर' के राष्ट्रीय…
अखिलेश्वर पांडेय की कविताएं
1. सही जगह कौन सी है! जहां सबकुछ सही है वह जगह कौन सी है वह जगह कौन सी है जहां कुछ भी गलत नहीं कोई ऐसी जगह भी है…
समीक्षा : रहस्य, रोमांच व अति मानवीय शक्तियों का समुच्चय “अस्तित्व की तलाश” – विजय कुमार तिवारी
हाल के वर्षों में जयपुर, राजस्थान के उपन्यासकार,साहित्यकार अजय शर्मा ने उपन्यास लेखन में तेजी से अपना नाम बुलंद किया है। वे वर्तमान में राजस्थान सरकार के प्रारम्भिक शिक्षा विभाग…
शिवमूर्ति के उपन्यास “अगम बहै दरियाव” पर आयोजित परिचर्चा-संगोष्ठी की रिपोर्ट
असग़र मेहदी सुविख्यात साहित्यकार शिवमूर्ति जी का उपन्यास ‘अगम बहै दरियाव’ ग्राम्य जीवन का ऐसा प्रामाणिक दस्तावेज़ है जो कई दशकों के अपने फैलाव के साथ वर्तमान ग्रामीण भारत की…
राकेश भारतीय की कविताएँ
आज़ादी जिसका नाम लेकर जिस-तिस को गरिया रहे हो जिसके नाम पर जहां-तहां आग लगाते फिर रहे हो वो ‘आज़ादी’ मुफ्त में नहीं मिल गई है, ऐ युवकों कोई ‘आज़ाद’…
रत्नेश कुमार की कविताएं
1. चुनाव चुनाव महासमर है अगणित अगर -मगर है दिखता डेग- डेग पर अपना गांव -शहर है भीतर बैठा डर है बाहर खड़ा क़हर है जभी लगता लहर है तभी…