रवि प्रताप सिंह की ग़ज़लें

*1.* छोड़ कर हम प्रेम गाथा अब सितम को होड़ दें। इन्क़लाबी हो क़लम या शायरी ही छोड़ दें ।…

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हॉलीवुड फिल्म “महायोगी:हाइवे 1 टू वननेस रिव्यू

डॉ. सत्य प्रकाश गुप्ता अध्यात्म क्या धर्म या मजहब से पृथक है?अध्यात्म क्या योग या ध्यान से अलग है? धर्म…

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दिनकर के काव्य में क्रांति और विद्रोह का स्वर : आदित्य अभिनव (चुम्मन प्रसाद)

धुँधली हुई दिशाएँ , छाने लगा कुहासा कुचली हुई शिखा से आने लगा धुँआ–सा । कोई मुझे बता दे ,क्या…

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