प्रकाश चन्द्र गिरि की कविताएं और ग़ज़लें

1. जैसे गाय को दुहने से पहले डाल दी जाती उसके सामने ताज़ा हरी घास जैसे बकरे को पत्तियां खिलाते…

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धर्मनिरपेक्षता का मतलब यह नहीं कि अपने धर्म को छोड़कर वोट की खातिर अपनी संस्कृति पर चोट करें : विजय सिन्हा

तुष्टिकरण की राजनीति में लोग ताजिया पूजे या बुरका पहन लें, लेकिन अपने धर्म का अपमान न करें : विजय…

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