Latest Literature News
प्रेमकुमार मणि की प्रस्तुति * रेणु का लोक * का सैद्धांतिक पक्ष दिग्भ्रमित करने वाला है : रामचंद्र ओझा
- रेणु नियतिवादी नहीं थे : हिन्दी साहित्य के जिन थोड़े से…
सलिल सरोज की ग़ज़लें
1. उतनी ही दूर देखा है, जितनी दूर नज़र आता है क्या…
हरे राम कात्यायन की कविताएं
1. जिंदगी की पढ़ाई जो तुम कहते हो उसी के आसपास…
जसबीर चावला की ग़ज़लें
1. शहर फिर शहर है, अपना बना लेता है कीमती रख लेता,…
चितरंजन भारती की कहानी : * ऐसे नहीं चलता काम *
सर्पीली सड़कों पर अरूण को गाड़ियाँ दौड़ाने में बहुत मजा आता है.…
पंकज चौधरी की कविताएं
1. जातिसभा/जातिपर्व भूमिहारों का टिकट कटा ब्राह्मणों को टिकट मिला। यादवों को…
डी एम मिश्र की ग़ज़लें
1. दाना डाल रहा चिड़ियों को मगर शिकारी है आग लगाने वाला…
अनिल विभाकर की कविताएं
दुख ----- दुख इस बात का है कि श्रीराम के होते हुए…
सुरेंद्र स्निग्ध की कविताएं
अगस्त के बादल ऊँची विशाल हरी-भरी पहाड़ियों के चौड़े कंधे पर शरारती…
निदा फाज़ली के साथ : * सुबहे ग्वालियर * : डॉ. गोपाल किशोर सक्सेना
आई.टी.एम. वि.वि. ग्वालियर 'इबारत' कार्यक्रम में. सुबह 10 बजे वक़ार सिद्दीक़ी साहब…