* स्पेस परफॉर्मिंग आर्ट्स के कलाकारों ने दीं कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां *
*राजू बोहरा / वरिष्ठ संवाददाता* नयी दिल्ली। आर्ट एंड कल्चर को समर्पित दिल्ली की जानी मानी संस्था ‘स्पेस परफॉर्मिंग आर्ट्स’ अब किसी खास परिचय की मोहताज नहीं। यह संस्था समय…
*फिल्म टीवी कलाकार एवं अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषी व टैरो कार्ड रीडर डॉ. शची केशरी को मिला ज्योतिष शिरोमानी सम्मान*
*(राजू बोहरा/ नई दिल्ली)* कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के तहत, अखंड ब्राह्मण समाज सेवा समिति, पाराशरीय ज्योतिष संसथान रायपुर और श्री महाकाल धाम अमलेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में पहले राष्ट्रीय ज्योतिष…
राज्यवर्द्धन की कविताएं
1. बीज --------------- बीज की तरह कवि धरती में बो देता है -कविता कविता धरती का कर्ज है धरती का कर्ज चुकाने के लिए कवि को लिखनी होती है-कविता। 2.…
अनिमा दास की कविताएं
क्षण भर वसंत (सॉनेट) एक वंशी.. यमुना तट.. रासकुंज.. एवं मैं स्वरित समीर की..सुगंधित शीतलता भी सुप्त स्वप्न में सौंदर्य का अन्वेषण भी है यामा की है यात्रा... प्रतीक्षा है…
डाॅ एम डी सिंह की भोजपुरी बसंत कविताएं
आइल बसंत सरसों फुललि आम बउराइल भर सिवान ऋतुराज छछाइल कोहरा बा कि मानत नइखे सूरुज ओके फानत नइखे आलू गोहूं टिकुरल हउवैं पाला नटई छाड़त नइखे चिउरा भूजा खा…
ब्रह्मर्षि-एक संस्कृति (आरंभिक) – राम रतन प्रसाद सिंह रत्नाकर
"संस्कृति" सामाजिक पारिवारिक विरासत है जो संचय से बढ़ता है। मानव का वह गुण जिसमें दया करूणा, परोपकार के भाव हैं, संस्कृति का हिस्सा है। ब्रह्मर्षि संस्कृति ऋषि-मुनियों एवं साधकों…
लेख : * वसंत-ऋतु, होली और रंग * – चितरंजन भारती
अभी कोई खास ज्यादा समय नहीं हुआ, जब समाज पर तकनीक और प्रौद्योगिकी का आक्रमण नहीं हुआ था और लोग मिल-जुलकर स्थानीय स्तर पर अपने तीज-त्योहार मना लिया करते थे।…
*हिन्दी भवन में साहित्यिक संस्था उद्भव एवं अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति यूएसए के संयुक्त तत्वावधान में वसंतोत्सव रचना पाठ का सफल आयोजन हुआ*
*राजू बोहरा / विशेष संवाददाता, नई दिल्ली* नई दिल्ली स्थित पुरुषोत्तम हिन्दी भवन सभागार में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था उद्भव एवं अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति यूएसए के संयुक्त तत्वावधान में…
संस्मरण : * पिता… * – यूरी बोतविन्किन
सोवियत आर्मी के सैन्य अभ्यास चल रहे थे खुले मैदान में। नवशिक्षित जवान टैंक चलाने की परीक्षा दे रहे थे। हर परीक्षार्थी के साथ एक अनुभवी निर्देशक, एक सैनिक अफ़्सर,…
डॉ. रामकृष्ण की ग़ज़लें
एक गगन से आ रही अनुगूँज तेरी तो नहीं है। हवा की पोटली में गंध तेरी तो नहीं है।। अचानक स्फर्श परिचित सा मुझे कोई छुआ हेँ। कि धड़कन काँपती…